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Monday, 23 October 2017

रिखणीखाल...भाग-02

रिखणीखाल ब्लॉक तहसील लैंसडोन, जिल्ला पौड़ी, विधानसभा, लैंसडौन उत्तराखंड में पड़ता है। पूर्व लेख में आप सभी पाठकों को मै इस कि जानकारी दे चुका हूं पर हल्की पुनराबर्ती कर दिया है।

शिक्षा-:इस क्षेत्र में शिक्षा एक सिरदर्द है करीब 6730 बच्चे अभी रिखणीखाल के 153 स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे है जुई ग्राम सभा में 4 बच्चों पर 3 अध्यापक है भोजन माता व आंगन बाडी अध्यापिका भी रहती है तो स्टाफ ज्यादा बच्चे कम कोटरी सैण में 95 बच्चों पर 2 अध्यापक है प्रायमरी स्कूल की बात है ये राजकीय इंडरमीडियट स्कूल बड़खेत में भवनों की मात्रा इतनी है कि पूरा एक गॉंव बस सकता है पर 6 अध्यापकों से 254 बचें देखे जा रहे है। देखे जाने शब्द का प्रयोग इस लिए कर रहा हूँ कि इस दसा में पढ़ाना सम्भव नही है।टांडियों, दरखसती खाल,डाबरी में भी हाल स्कूल के यही है। सरकारी की अनेकों फोरमल्टीज भी है जनगणना, आधरकार्ड,कुपोषण,इलेक्सन ड्यूटी,छात्र तालिका भरना, सिर्फ एक अध्यापक पढ़ाने के सिवाय सभी काम करता है।

कुछ हाल कमोबेश द्वारी स्कूल का भी वही है भवन नया तो बना है पर हालत बहुत खराब है भवन के और समूचे क्षेत्र में 50% अध्यापक तो रोज कोटद्वार से क्षेत्र में अपडोंन करते है। वजह साफ है उन के अपने बच्चे कॉन्वेंट स्कूल या शिशु मन्दिर में पढ़ते है। अगर क्षेत्र में शिक्षा अच्छी होती तो शिक्षक अपने बच्चों को वहीं अस्थानिय स्कूल में क्यों नही रखते।

 राजकीय विद्यालय करतिया में शिक्षा का ये हिसाब है कि 50% बच्चे आप को मंदाल नदी में मच्छी मारते हुए देख जाएंगे। कोई सड़क सुविधा नही है। फिलहाल जो सड़क भी बनी है वो बर्षात में बंद हो जाती है। प्राथमिक विद्यालय गाजा इस छेत्र में ऐसा विद्यालय है जहाँ भवन और अध्याक ठीक ठाक है। राजकील विद्यालय बुंगलगड़ी भी शिक्षकों का रोना रौ रहा है यहाँ पर स्कूल के नजदीक में बाजार है जिस की वजह से सोर गुल से बच्चे अच्छे से पढ़ नही पाते है। चपडेत श्री दलीप रावत जी का गॉँव है जो बर्तमान में इस क्षेत्र से दूसरी बार विधायक है श्री दलीप रावत जी BJP के उम्मीदवार है औऱ उन के पिता स्वरश्री भारत सिंह रावत जी भी 4 बार इसी क्षेत्र से विधायक रहे है।

किल्बो खाल का हाल भी यही है ये स्कूल सन 2000 तक जनता स्कूल हुआ करता था तब यहाँ पर पढ़ाई बहुत ही अच्छी थी क्षेत्र के लोगों को यहां अपने बच्चों को पढ़ाना सपना लगता था। जब कि यहां उस वक्त 12 km पैदल रास्ता तय कर के जाना होता था पर आज कारगिल शाहिद अनसूया प्रसाद जखमोला मोटर मार्ग होने के बावजूद भी यहाँ बदहाली अन्देखी का रोना है। उसी की बगल में ग्राम सभा खिकरयूं में भी हाल बहुत भुरे है। ग्राम सभा चौकड़ी चुराणी,कोटनाली, कलवाडी क्षेत्र के बड़े गॉंव में आते है यहां के लोग अमीर ज्यादा है पहले से ही इस कि वजह ये है कि यहां खेती पहले से कम रही है या फिर दूर नयार के किनारे जैकोट सारी इन लोगों की खेती है,जिस वजह से इस क्षेत्र के लोग पहले से ही दिल्ली चंडीगढ जैसे जगह पलायन हो गए है। पर जो गॉंव में है भी अन्य गाँव के मुकाबले पैसे वाले है।

इस क्षेत्र में एक स्कूल है जो 18 गाँव को जोड़ता है शिद्धखाल जो क्षेत्र का अकेला ऐसा स्कूल है जिस स्कूल में आप गाड़ी सीधा लेजांयेगे वरना सब जगह ये हालत नही है सड़क की यह स्कूल कोटद्वार से बीरोंखाल जाने वाले रास्ते में पड़ता है। शिक्षा भी अच्छी है यहाँ अन्य स्कूलों के मुकाबले पर भवन अच्छे नही है लैब नही है ।एक मात्र फील्ड है जिस में बॉलीबॉल ही खेला जा सकता है बस बाकी कोई सुविधा नही है।

अब बात करता हूँ क्षेत्र के सब से पुराबे स्कूल और एक मात्र महाविद्यालय रिखणीखाल की जिस में भवन की कमी अध्यापकों की कमि पूरे बिषय न होना लैब की कमी पुस्तकालय का अभाव फील्ड की कमी और बिजली की किल्लत आदि बहुत सी कमियाँ है यहां पहके स्कूल में पढ़ाई अच्छी थी पर जब से महाविधालय खुला प्रायमरी स्कूल और माध्यमिक विद्यालय की हालत खराब हो गई है 100 मीटर पर है ये तीनों विद्यालय।

राजकीय उच्चतम माध्यमिक बिद्यालय खदरासी यह बिद्यालय करतिया की तरह मंदाल नदी के किनारे है सड़क की कोई सुविधा नही है झूला पुल ही इस को देश से जोड़ता है। खदरासी रिखणीखाल व नैनीडांडा के बॉर्डर पर बसा है। यह बिद्यालय सन 1999 तक जनता बिद्यालय था उचिकरण के साथ साथ इस बिद्यालय का निम्नी करण भी हुआ है करीब 5 साल तक तो यहां साइंस का क्लास ही नही था अब है और लैब नही है प्रशिक्षण के लिए। इस रिखणीखाल क्षेत्र में आज भी ७५% छात्र नकल कर के पास होते है दावे के साथ बोल रहा हूँ।

सन 2003 में केंद्र की मनमोहन सरकार ने एक योजना चलाई थी जिस का नाम है आंगनबाड़ी जिस के तहत  ग्रामीण और शहरी छेत्र में बालबिकाश, महिलाउन्मूलन, जच्चा बच्चा देख रेख, कुपोषण, पोलियो टीका ,प्रथम शिक्षा और अन्य कही बिभागों से मिला कर  योजना चलाई जो सुरुवात में ही धरातल पर दम तोड़ गई। जिस के लिए न नियम कड़े बने न कानून न भवन न यह भी हमारे क्षेत्र में है पर पूरे देश की तरह इसे विभाग द्वारा दिये गए सत्तू बिस्कुट,आयोडिन नमका,दलिया आंगनवाड़ी बहिनजी के गाय,भेंस खा रही है।

कुछ हाल कुलाणी खाल के भी ऐसे ही है पृथक राज्य के बाद इस बिद्यालय का भी जीर्णोद्धार और उचिकरण हुआ और शिक्षा का अभी तक कोई आता पता नही है। ज्ञान बाबा को डेराखाल से आगे का रास्ता नही मिला। ताड़केश्वर धाम के नजदीक घोटाला,अंगणी मनि गाँव मंजुली की दसा भगवान ताड़केश्वर भी बयां नही कर सकता है। कुलाणी खाल का तो सिर्फ भवन का उच्चीकरण हुआ है शिक्षा का तो मजाक ही बना है। खुबाणी, लयकुली,बडेर गाँव, छाड़ियाणी, धुरा,बराई, खनेता,सोली,टांड़यों,सिल गाँव, नावे तल्ला,मल्ला,गाडियों, उनेरी,ढाबखाल, सींदी, सिमल गॉंव, पानीसेण, सुन्दरोली, बूंग,किमाड, सिनाला, इन गॉंवों के स्कूल चौपट है किसी भी प्रकार की शिक्षा के लिए रात नही खुली है।

श्वासथ्य सेवा-:एक मात्र चिकित्सा केंद्र रिखणीखाल में है जो मुख्य बाजार से 3km दूर है देबुखाल बैंड पर जिस में 108 सेवा बहुत अच्छी है पर यहाँ भी भवन बने हुए 25 साल हो गए आज तक कोई सुविधा नही है फस्टेडबॉक्स के लिए भी सामान मरीज से मँगवाया जाता है वो किसी केमिस्ट्री की दुकान में जायेगा ढूंडेगा फिर वार्डबॉय या कामचलाऊ नर्स उस की मरहमपट्टी करेंगे हर साल यहां डॉ बदलते है डॉ कम कमपोटर ज्यादा बदलते है ये लोग स्थानीय है तो ठीक है वरना सभी कोटद्वार से आते जाते है रोज,3 घण्टा आना3 जाना तब कैसे स्वास्थ्य सेवा होगी उन को ही कुछ दिन में हड्डी दर्द की गैस की दिक्कत हो जाएगी।

तिमलसेंण डिस्पेंसरी में 2 स्टाफ है पर दवाई नही है। रथुवाधाब डिस्पेंसरी में भी दवाई नही 1 स्टाफ खदरासी में भी फोड़े की दवाई मिलेगी बस 1स्टाफ किमाड में भी वही हाल गुनेड़ी,बएला,बूंगा में भी हालत खराब है स्वास्थ्य सेवा के लिए सब से नजदीक 85km कोटद्वार है और वहाँ भी नए भवन की चकाचोंद में दवाइयां रास्ता भूल गए जितने भी डॉ है वो निजी क्लीनिक खोले है और 200₹ का फीस लेते है फिर उस से नजदीक है जौलीग्रांट, दून या इंद्रेश AIIMS ऋषिकेश जहां डॉ की सीट पर कुत्ते बैठे होते है हॉस्पिटल के अंदर गाय घुस जाती है।

75% गॉँव में सड़क न होने की वजह से 108 एम्बुलेंस नही जा पाती है इस वजह से मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते है। जो मरीज रिखणीखाल हॉस्पिटल पहुंच भी जाते है वहां सुविधा न होने की वजह से मरीज की हालत खराब हो जाती है।

पूरे पौड़ी जिल्ला में 15 ब्लॉक है और उत्तराखण्ड में 95 ब्लॉक है पर समूचे उत्तराखण्ड के पिछड़ा ब्लॉक में रिखणीखाल तीसरे स्थान पर है वजह तो हम को भी नही पता है ग़द्दावर नेता निकले है यहां से पर निकलते ही वापस नही आये बेचारे। वैसे गढ़वाल मण्डल से उत्तराखण्ड में ज्यादा cm बने है कुमाव मण्डल से कोशियारी जी व तिवारी जी cm बने थे और कुमाव मण्डल आज गढ़वाल मण्डल से आगे है हम को फक्र है कि किसी ने तो अपने क्षेत्र के बारे में सोचा हम सकारात्मक सोच रखते है इस लिए ऐसा बोल रहे है पर cm साहब साब के थे वो।

सुरक्षा-: छेत्र में सुरक्षा के इतंजाम ये है कि कोई थाना ही नही है पहले हर रोज 3 पुलिश वाले लैंसडौन से आते थे और साम को चले जाते थे पर अब 4 पुलिश वाले 4 होमगार्ड की तैनाती तो है पर उन को कोई सुविधा नही मिलती वो अनाथों की तरह जीवन गुजारते है इस में वो क्षेत्र के लोगों की सुरक्षा क्या करेंगे।
गुलदारों का रिख का आतंक है इस क्षेत्र में जिमकरबेट पार्क ढिकाला से लगे होने के कारण यहां बन्यजीवों को आप मार नही सकते हो और बन्यजीव आप को मार दे कोई खोज खबर नही। सरकार के नियम के हिसाब से अगर जानवर ने किसी को मार दिया तो 6 लाख का मुवाजबे का प्रावधान है पर कोई फोरेस्टगार्ड नही है क्षेत्र में अगर है भी तो वो मेदावन, मुंडिया पाणी, कांडा रथुवाढाब से ऊपर नही आते। खुद वो लोग जंगलों से तस्करी करते है चरस गांजा, लकड़ी,मच्छी बन्यजीवों की।

बिगत 6 साक पहले ग्राम धामदार में बाघ ने 5 लोग खा दिए लोगों ने बाघ मार दिया पर इस जुर्म में 10 लोग आज भी जेल में है। ऐसी बहुत कहानियां है उस क्षेत्र की। अल्मोड़ा के गोंछ मच्छी मारने का तो ताजा केश देखा होगा आप ने 135kg के मच्छी को मारने वाले लोग भी व 170 अन्य लोग कानून की धारा में रामगंगा के गोते खा रहे है।

राजस्व का फायदा-: यह क्षेत्र राजस्व अर्जन के लिए बहुत अच्छा है जड़ी बूटी लकड़ी,फुलझाडू का कार्य आराम से हो सकता है (राजस्व मतलब सरकार के आय का साधन ये सरल भाषा है) पर यहां तो सब कुछ होते हुए भी कुछ नही है हर साल जंगलों में आग लग जाती है जिस में हजारों पेड़ जल के राख हो जाते है जामिन्ह में गिरे हुए पेड़ों को सरकार चाहे टी नीलाम कर सकती है जिस से फर्नीचर के कारोबारी आय कर सकें या कोयला बनाया जा सके।2011 और 2013 में आये आपदा में बंजादेवी झूला पुल बह  गया था आज भी वो पुल वैसा ही है नोदानु,करतिया,झरत,छरगड़ी,ढूंगीचोड,गोलीचोड, अम्डडा को जोड़ने वाला एक मात्र मंदाल नदी पर ये पुल है और करतिया स्कूल जाने वाले बच्चों को रोज कठिनाई का सामना करना पड़ता है। आम जनजीवन की गाड़ी भी नदी नालों में फंसी है।
यही हाल गाजा,मुछेल गाँव गल्ले गॉँव दबराड, सेरा गाड़ को जोड़ने वाला पुल ढोंटियाल मंदिर के पास 4 साल पहले बह गया।

आपदा में मेलधार गॉँव पूरीतरह से दब गया था मलवे में उन के पुनर्वास की बात भी अधर में लटकी है,सरकार बदली पर सूरतें हाल नही।
तिमल सैण,डोबरियाल का पुल, सिरवाणा डगु का पुल, ऐसे नजाने बहुत से पुल है जो आपदा की भेंट चढ़ गए और आज तक किसी ने उन की सुधि न ली। सब लोग चाटुकारिता में ब्यस्त है और क्षेत्र बदहाली का रोना रौ रही है।

कुछ गॉँव जैसे चेबड़,तेडिया,पांड,धुरा,धूताडाँड़ ,कुडू डाँड़,टांड़यों,सिल गाँव,राजबो मल्ला, कुमे खत्ता, जोशी डाँड़, बल्ली,घोटली,बनगढ़ ये गॉँव बहुत ही दुर्गम जगह है यहाँ सुखः सुविधा 0% है पर लोग अभी भी उम्मीद में है कि कभी तो विकाश का सूरज उगेगा।

इस क्षेत्र में जो भी सरकारी  भवन टूटा या जरजर हुआ उस का कोई मालिक नही है। ऐसा नही है कि यहां कोई नेता आता नही है डॉ हरक सिंह रावत (जब राजस्व मंत्री थे तब 3 बार आये और अभी चुनाव के बख्त 2 बार) हरीश रावत (पूर्व मुख्यमंत्री) लगभग 3 बार आये सुरेंद्र सिंह नेगी लगभग हर 2,3 साल में आते है खण्डूरी जी पर आंसुओं की बारिश कर के सब निकल जाते है। कहते है 1983 में इंद्रागांधी ने इस छेत्र के लिए अलग पैकेज की घोषणा की थी और वो 1984 तक काम सुरु नही हुआ और आज भी 1984 वापस नही आया। स्वेज विभाग,स्वजल ग्राम,भूमि संरक्षण इकाई,समूह गाह,खाद बीज विभाग,पशुपालन पालन, पशुचिकित्सा,sbi बैंक ,pnb बैंक, अलकनन्दा ग्रामीण बैंक कॉर्पोरेशन बैंक इस इलाके में है पर बैंकों में सर्वर डोन ही रहता है,या बिजली नही होती है। राजस्व कैसे प्राप्त होगा। एक सराब का ठेका है पर इस बार ठेका बंद कराओ आंधी में वो भी बंद हो गया कभी बयला कभी देवूखाल कभी कभी सिरवाणा कभी बल्ली व दालमोट में दारू गाड़ी से बेची जाती है। उस ठेके में हर दारू की बोतल 500₹ की होती थी रात दिन मदिरा मिलता था। पर क्षेत्र की दारु की पूर्ती आर्मी से सेवानिबरित लोग या सेवारत लोग कर रहे है गैर तरीके से भी दारू मिलता है। कोटरी सैण गाड़ियों पुल रिखणीखाल, देबुखाल, चकोलिया खाल ढाबखाल और गॉँव में कच्ची शराब।

इस क्षेत्र में दूध उत्पादन, मछली उत्त्पादन, बकरी, भेड या मवेशियों का ब्यापार आसानी से हो सकता है पर अब पलायन की भयानक स्थिति की वजह से मजबूर लोग गाँव में रह गए है जो खुद को मजबूरी में मजबूर बताते है। जिन के पास पैसा है वो घर छोड़ चुके है। खेलने के मैदान बन सकते है इस छेत्र में पर वो भी नही हो रहा है आय की हजारों श्रोत है पर सभी स्रोतों को सरकार की अनदेखी ने बंद कर दिया है।

खेल-: बॉलीबॉल इस क्षेत्र का मुख्य खेल रहा है वजह साफ है कि कोई और खेल खेलने के लिए लोगों के पास जगह नही थी। बॉलीबॉल खेलने के लिए ज्यादा बड़ा फील्ड नही चाहिए और कुछ फील्ड है क्षेत्र में जैसे करतिया,कुमालडी (वैसे अब ये फील्ड आधा नदी में बह गया) आठबाखल में  है पर बाकी जगज ऊपरी इलाकों में खेतों में खेल खेले जाते है।

एक जमाना था ज इस क्षेत्र में जाने माने बोलिबोल खिलाड़ी थे। जैसे-:बिक्रम सिंह नेगी (बड़खेत) भोपाल सिंह गुसाईं (राजबो) भारत सिंह रावत (आठबाखल) देवपाल सिंह रावत (द्वारी गाँवणा) चुर्रा भाई (धामदार) महावीर सिंह नेगी (कुमालडी) लक्ष्मण सिंह नेगी (सिरस्वाडी) पुष्कर सिंह (चुरानी) गुलडांग सिंह (कलवाड़ी) परवीन सिंह नेगी (सुन्दरोली) सूरज सिंह,बोली भाई,सतेंद्र सिंह विनोद सिंह(बराई धूरा) त्रिलोक सिंह (कांडा नाला) विक्रम सिंह रावत (कोटरी) केदार सिंह रावत (कोटरी) यशवंत सिंह (पलिगांव) दीवान सिंह (द्वारी) भारतेंदु सिंह पटवाल (कोटरी) अनिल नेगी (चपडेत) चंद्र मोहन सिंह (तिमल सैण) नरेंद्र सिंह (कलवाड़ी) हरीश रावत (चौकड़ी) देवेन्द्र सिंह (मलण गाँव) यशवंत सिंह (ढुङ्गधार) गम्भीर सिंह (राजबो) श्याम सिंह (राजबो) जय दीप सिंह बिष्ट (चौकड़ी) भारतीय मुक्के बाजी के कोच है अभी जयदीप सिंह बिष्ठ जी।

लगभग सभी लोग आर्मी में है भारतीय सेना में इन लोगों ने क्षेत्र का नाम रौशन किया है। पर कोई खेल अकैडमी नही बन पाई इस क्षेत्र में। पर अब नशा खोरी ने क्षेत्र के युवा को अंदर से खोखला कर दिया है। बीते कुछ सालों में क्षेत्र में जितनी भी योजना आई है पिछले नेताओं ने सब को डकार दिया है न बिधायक भुरा है न सांसाद भुरा है जो क्षेत्र में छोटे नेता है उन के वजह से क्षेत्र का बेड़ा गर्क हुआ है वो लोग क्षेत्र से रिपोर्ट आगे नही देते है कुछ तो बहुत बढ़िया है पर दो चार ने क्षेत्र का नाम बदनाम किया है।

कभी कोई अधिकारी क्षेत्र में आभी गया तो उसे कोई टिकने नही देता है कोई खेल का मैदान भी बनने लगा तो लोग अपनी राजनीति बीच में लेकर आजाते है। रजबो का रोड छड़ियानी का रोड डबराड, नावे तल्ला उप गाँव रोनेड़ी कुमालडी, ये सब रोड इसी राजनीति के भेंट चढ़े है।
मुझे उम्मीद है कुछ होगा क्षेत्र में जो आज तक नही हुआ है लोग जागरूक होंगे अपने घरों को लौटेंगे अर क्षेत्र के विकाश में योगदान देंगे।
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लेखक-:देवेश आदमी (प्रवासी)
दूरभाष-: 9716541803
पट्टी पैनो रिखणीखाल
जिल्ला पौड़ी गढ़वाल
(देवभूमि उत्तराखंड)

1 comment:

  1. भैजी आपका पूरा लेख पढा बहुत लगा अच्छा लगा आपने जो कुछ भी रिखणीखाल ब्लाक के बारे मे लिखा है बिल्कुल सत्य लिखा है !!

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