आज बात कर रहा हूँ मै भारत सम्बिधान में सूक्ष्म रूप से छिपी अदृश्य मंत्रालय का जिस का नाम है बेवकूफ मंत्रालय जिस का प्रयोग लोगों को जनता को बेवकूफ मनाने में किया जाता है।
घोषणा पत्र के माध्यम से या अन्य किसी लोकलुभावन वादों के माध्यम से इस मान्त्रलय को अचानक संचालित किया जाता है और फिर इस मंत्रालय की शिकार होते है लोग। जैसे रामानन्द और मोती सागर के नाटकों की तरह सभी पात्र गायब हो जाते है वैसे ही ये मंत्रालय भी अचानक गायब हो जाता है।
नेहरू जी से लेकर मोदी जी तक बलभभाई पटेल जी से राजनाथ जी तक इस मंत्रालय के अध्यक्ष रहे है।
उत्तराखण्ड में इस मंत्रालय की स्थापना किसी से छिपी नही है जब हम up में थे तो चौधरी चरण सिंह जी राजनाथ जी मुलायम जी कल्याण जी मायावती अखिलेश,और अब योगी जी जैसे लोगों ने सत्ता के गलियारों से बेवकूफ मंत्रालय का चाबुक खूब चलाया,,
बात है 17 साल पुरानी जब देश का 29 वां राज्य बना झारखण्ड और छत्तीसगढ़ के बाद उत्तरांचल का 9 नवम्बर 2000 को तब की राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले हरियाणा से पैरा मुख्यमंत्री श्री नित्यानंद स्वामी जी की ताजपोशी हुई केंद्र में बैठे श्री अटलबिहारी जी ने उसी वक्त घोषणा पत्र चस्पा दिए जिस में अतुल्य योजनाएं थी जिस को साकार करना उस वक्त के अमेरिका में राष्ट्रपति वैलक्लिंटन भी सिद्दत से कोसिस करते तो सम्भव नही होता,,अब जो योजना आप को दे रहा हूँ वो देवेश आदमी के नही तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल जी के है।
कुछ घोषणा से वे योजनावों से रूपबरु करते है आप को,,
घोषणा पत्र सन 2000
1. प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में 2 शिक्षा मित्रों की तैनाती और 1000 नये शिक्षण क्षेत्र में 2000 नए शिक्षामित्रों की तैनाती।
2. उत्तरांचल को शिक्षा विहार के रूप में विक्षित करने का संकल्प।
3. उत्तरांचल ऊर्जा नियमों का प्रारूप तैयार करने का प्रस्ताव। 400 से अधिक जगहों पर लघु बिधुत परियोजना की स्थापना पर बिचार।
4.पशु नस्ल सुधार, देरी विकास, फल सब्जी उत्तपति की बैज्ञानिक रणनीति।
5. 22 हजार एकड़ की जमीन पर चाय बागानों की योजना द्वारा स्वरोजगार का सृजन।
6. 43 जगहों पर निजी और सरकारी चाय फैक्ट्रियां लग सकेंगी।
7.पुलिश तंत्र के आधुनिकरण की तैयार केंद्र सरकार से 13 करोड़ 43 लाख की धन स्वीकृति।
8. धार्मिक एवं साहिसिक पर्यटक को आकर्षक बनाने हेतु "उत्तरांचल चलो" का अभियान।
9. खेलों के क्षेत्र में नई प्रतिभा को प्रोत्साहन।
10. वन प्रबंधन में ग्रामीणों की सहभागिता कर वन पंचायतों को प्रोत्साहन।
11.उत्तरांचल में 5 हवाई पट्टियों को स्वीकृति/क्रियाशील करने की योजना।
12. आपदा ग्रसित 80 लक्षित गाँव के लिए आपदा प्रबंधन कार्य योजना तैयार करना।
ये हमारे आंकड़ें या हमारी पोथी नही है अटल जी का धोषणा पत्र है जो स्वामी जी फिर कोशियारी,तिवारी,खण्डूरी, निशंक,हरीश,त्रिवेन्द्र होते हुए पहुंचा है यहाँ।
अब हम को चक्कर आरहा है कि कहां 5 हवाई पट्टी है कहाँ पुलिश सुदृढ़ हुई कहा वो 13 करोड़ गए। सन 2000 से सन 2017 तक उत्तराखण्ड को 50 हजार करोड़ का भीख मिल चुका है।
उत्तरांचल राज्य की नींव ही 16569 करोड़ के घाटे से सुरु हुई थी। हर सरकार इस घाटे को बढ़ाता गया और आज 44 हजार करोड़ के कर्जे में है मेरा देवभूमि।
वन,आयुष,बिधुत,जलनिगम जैसे बहुत से बिभागों का My बाप आज भी UP सरकार है। अहसान मध्यप्रदेश के भी कम नही है जो कुल बिधुत उत्तपादन का 43% हम से वसूलता है। खनन का पैसा हमारे बड़ेभाई UP लेजाता है।आज हम चीन के सामान का बहिष्कार कर रहे है पर बिजली में चीन ही हमारा सब से बड़ा खरीदार है। हम देश में कर्जदार है शरणार्थियों की तरह जिंदागी है हमारी अगर आप उत्तराखण्ड के हो और अमीर हो तो इतराओ नही आप भी कर्जदार हो।
बिजली हमारी जमीन हमारी पानी हमारी पर कुल उत्तपादन का 23% ही हम को मिलता है। उत्तराखण्ड आज बिधुत प्रदेश के नाम से जाना जाता है पर बिजली भी खरीदनी पड़ती है हम को।
वादे तो बहुत हुए है साहब पर अमलीजामा आज तक नही पहना पाया कोई अटल जी और तिवारी जी आज अपने जीवन के आखरी सांसे गिन रहे है पर आखरी सांस में भी कभी उत्तराखण्ड का भला नही सोचा होगा।
कुल मिला के पहले देश में बेवकूफ मंत्रालय बनता है फिर अन्य मंत्रालय।
राजनीति में कोई किसी से कम नही एक पार्टी बहुत भ्रट है दूसरी उस से भी ज्यादा धुर्त है। तर्क शास्त्र को आज त्रुटि शास्त्र से जोड़ दिया जाता है।
महान आर्थर ने सायद आज को पहके ही देख लिया था उन का कहना था विपक्ष का पूर्ण रूप से खत्म होना लोकतांत्रिक देश के लिए खतरा है। अत्यधिक मान और सम्मान भी आप के मान सम्मान व गुरुर को लालच बना देता है। जिस तरह से मणिपुर,गोआ,उत्तराखंड में बिगत 1 साल में राजनीति शास्त्र का खेल चला बड़े से बड़ा देश हम भारतीय लोगों को संमझ नही पाया। जिस तरह से पिछली केंद्र की सरकार ने अरबों के घोटाले किये हम लोगों को भी पता चल गया कि अरब में शून्य कितने होते है। एक लेखक थे न्यूज़ीलैंड के ब्रायन गाड़जों जो दुनियाँ में भ्रष्टाचार पर सोध रह रहे थे उन्हों ने कहा भारत हर समय भृष्टाचारी का शिकार रहा है चाहे मुगल काल हो या मनमोहन काल भृष्टाचार भारत की हवा में बसा है कुछ दिन तक भरस्टाचार देश में कम हो तो समझना तूफान से पहके का सन्नाटा है वो।
ब्रायन ने अपनी पुस्तक में लिखा था भारत किसी अंग्रेज या मुगल के गुलाम नही रहा है सिर्फ भृष्टाचारी के गुलाम रहा है।
अब मुझे डर लग रहा है कि आज ही देश के सम्मनित सरवोच्चन्याय ने आदेश किया है कि किसी ब्यक्तिगय कितपणी से बचें आप पर मानहामी का दावा हो सकता है 4 करोड़ केश पहके से देश में लम्बित पड़े है मेरा भी केश हो गया तो क्या होगा,,,अजरविन केजरीवल ओर अरुण जेटली ने केश किया मानहामी का आज बेचारे जेटनी जो कि देश के वित्तमंत्री है उन को जज ने बैरंग लोटा दिया तो देवेश आदमी की क्या औकात पर छोड़ो जी,,,आप
*********
देवेश आदमी
घोषणा पत्र के माध्यम से या अन्य किसी लोकलुभावन वादों के माध्यम से इस मान्त्रलय को अचानक संचालित किया जाता है और फिर इस मंत्रालय की शिकार होते है लोग। जैसे रामानन्द और मोती सागर के नाटकों की तरह सभी पात्र गायब हो जाते है वैसे ही ये मंत्रालय भी अचानक गायब हो जाता है।
नेहरू जी से लेकर मोदी जी तक बलभभाई पटेल जी से राजनाथ जी तक इस मंत्रालय के अध्यक्ष रहे है।
उत्तराखण्ड में इस मंत्रालय की स्थापना किसी से छिपी नही है जब हम up में थे तो चौधरी चरण सिंह जी राजनाथ जी मुलायम जी कल्याण जी मायावती अखिलेश,और अब योगी जी जैसे लोगों ने सत्ता के गलियारों से बेवकूफ मंत्रालय का चाबुक खूब चलाया,,
बात है 17 साल पुरानी जब देश का 29 वां राज्य बना झारखण्ड और छत्तीसगढ़ के बाद उत्तरांचल का 9 नवम्बर 2000 को तब की राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले हरियाणा से पैरा मुख्यमंत्री श्री नित्यानंद स्वामी जी की ताजपोशी हुई केंद्र में बैठे श्री अटलबिहारी जी ने उसी वक्त घोषणा पत्र चस्पा दिए जिस में अतुल्य योजनाएं थी जिस को साकार करना उस वक्त के अमेरिका में राष्ट्रपति वैलक्लिंटन भी सिद्दत से कोसिस करते तो सम्भव नही होता,,अब जो योजना आप को दे रहा हूँ वो देवेश आदमी के नही तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल जी के है।
कुछ घोषणा से वे योजनावों से रूपबरु करते है आप को,,
घोषणा पत्र सन 2000
1. प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय में 2 शिक्षा मित्रों की तैनाती और 1000 नये शिक्षण क्षेत्र में 2000 नए शिक्षामित्रों की तैनाती।
2. उत्तरांचल को शिक्षा विहार के रूप में विक्षित करने का संकल्प।
3. उत्तरांचल ऊर्जा नियमों का प्रारूप तैयार करने का प्रस्ताव। 400 से अधिक जगहों पर लघु बिधुत परियोजना की स्थापना पर बिचार।
4.पशु नस्ल सुधार, देरी विकास, फल सब्जी उत्तपति की बैज्ञानिक रणनीति।
5. 22 हजार एकड़ की जमीन पर चाय बागानों की योजना द्वारा स्वरोजगार का सृजन।
6. 43 जगहों पर निजी और सरकारी चाय फैक्ट्रियां लग सकेंगी।
7.पुलिश तंत्र के आधुनिकरण की तैयार केंद्र सरकार से 13 करोड़ 43 लाख की धन स्वीकृति।
8. धार्मिक एवं साहिसिक पर्यटक को आकर्षक बनाने हेतु "उत्तरांचल चलो" का अभियान।
9. खेलों के क्षेत्र में नई प्रतिभा को प्रोत्साहन।
10. वन प्रबंधन में ग्रामीणों की सहभागिता कर वन पंचायतों को प्रोत्साहन।
11.उत्तरांचल में 5 हवाई पट्टियों को स्वीकृति/क्रियाशील करने की योजना।
12. आपदा ग्रसित 80 लक्षित गाँव के लिए आपदा प्रबंधन कार्य योजना तैयार करना।
ये हमारे आंकड़ें या हमारी पोथी नही है अटल जी का धोषणा पत्र है जो स्वामी जी फिर कोशियारी,तिवारी,खण्डूरी, निशंक,हरीश,त्रिवेन्द्र होते हुए पहुंचा है यहाँ।
अब हम को चक्कर आरहा है कि कहां 5 हवाई पट्टी है कहाँ पुलिश सुदृढ़ हुई कहा वो 13 करोड़ गए। सन 2000 से सन 2017 तक उत्तराखण्ड को 50 हजार करोड़ का भीख मिल चुका है।
उत्तरांचल राज्य की नींव ही 16569 करोड़ के घाटे से सुरु हुई थी। हर सरकार इस घाटे को बढ़ाता गया और आज 44 हजार करोड़ के कर्जे में है मेरा देवभूमि।
वन,आयुष,बिधुत,जलनिगम जैसे बहुत से बिभागों का My बाप आज भी UP सरकार है। अहसान मध्यप्रदेश के भी कम नही है जो कुल बिधुत उत्तपादन का 43% हम से वसूलता है। खनन का पैसा हमारे बड़ेभाई UP लेजाता है।आज हम चीन के सामान का बहिष्कार कर रहे है पर बिजली में चीन ही हमारा सब से बड़ा खरीदार है। हम देश में कर्जदार है शरणार्थियों की तरह जिंदागी है हमारी अगर आप उत्तराखण्ड के हो और अमीर हो तो इतराओ नही आप भी कर्जदार हो।
बिजली हमारी जमीन हमारी पानी हमारी पर कुल उत्तपादन का 23% ही हम को मिलता है। उत्तराखण्ड आज बिधुत प्रदेश के नाम से जाना जाता है पर बिजली भी खरीदनी पड़ती है हम को।
वादे तो बहुत हुए है साहब पर अमलीजामा आज तक नही पहना पाया कोई अटल जी और तिवारी जी आज अपने जीवन के आखरी सांसे गिन रहे है पर आखरी सांस में भी कभी उत्तराखण्ड का भला नही सोचा होगा।
कुल मिला के पहले देश में बेवकूफ मंत्रालय बनता है फिर अन्य मंत्रालय।
राजनीति में कोई किसी से कम नही एक पार्टी बहुत भ्रट है दूसरी उस से भी ज्यादा धुर्त है। तर्क शास्त्र को आज त्रुटि शास्त्र से जोड़ दिया जाता है।
महान आर्थर ने सायद आज को पहके ही देख लिया था उन का कहना था विपक्ष का पूर्ण रूप से खत्म होना लोकतांत्रिक देश के लिए खतरा है। अत्यधिक मान और सम्मान भी आप के मान सम्मान व गुरुर को लालच बना देता है। जिस तरह से मणिपुर,गोआ,उत्तराखंड में बिगत 1 साल में राजनीति शास्त्र का खेल चला बड़े से बड़ा देश हम भारतीय लोगों को संमझ नही पाया। जिस तरह से पिछली केंद्र की सरकार ने अरबों के घोटाले किये हम लोगों को भी पता चल गया कि अरब में शून्य कितने होते है। एक लेखक थे न्यूज़ीलैंड के ब्रायन गाड़जों जो दुनियाँ में भ्रष्टाचार पर सोध रह रहे थे उन्हों ने कहा भारत हर समय भृष्टाचारी का शिकार रहा है चाहे मुगल काल हो या मनमोहन काल भृष्टाचार भारत की हवा में बसा है कुछ दिन तक भरस्टाचार देश में कम हो तो समझना तूफान से पहके का सन्नाटा है वो।
ब्रायन ने अपनी पुस्तक में लिखा था भारत किसी अंग्रेज या मुगल के गुलाम नही रहा है सिर्फ भृष्टाचारी के गुलाम रहा है।
अब मुझे डर लग रहा है कि आज ही देश के सम्मनित सरवोच्चन्याय ने आदेश किया है कि किसी ब्यक्तिगय कितपणी से बचें आप पर मानहामी का दावा हो सकता है 4 करोड़ केश पहके से देश में लम्बित पड़े है मेरा भी केश हो गया तो क्या होगा,,,अजरविन केजरीवल ओर अरुण जेटली ने केश किया मानहामी का आज बेचारे जेटनी जो कि देश के वित्तमंत्री है उन को जज ने बैरंग लोटा दिया तो देवेश आदमी की क्या औकात पर छोड़ो जी,,,आप
*********
देवेश आदमी
No comments:
Post a Comment