पलायन और उस के कारण हो रहे सांस्कृतिक धार्मिक और सामाजिक विच्छेदन के
प्रति उत्तराखण्ड समाज और नेतृत्व लगातार चिन्तित है सभी लोग अपने अपने
स्तर पर अपनी अपनी समझ से इस विच्छेदन को दूर करने के प्रयास कर रहे है।
रिखणीखाल महोत्सव इसी दिशा में किया जाने वाला एक प्रयास है । 15/05/2018 से 17/05/2018 के मध्य में होने वाले तीनदिवसीय एतिहासिक भब्य रिखणीखाल महोत्सव क्षेत्र के विकास की नीव रखने वाला है। रिखणीखाल महोत्सव के माध्यम से हम रिखणीखाल के आवासी और प्रवासी अपने जाड़ों को ढूंडने उसे समझने और उन से जुड़ने का प्रयास कर रहे है।
इस महोत्सव के माध्यम से जहाँ हम एक तरफ अपने धार्मिक प्रतीक (ग्राम देवता जल देवता) को याद करेंगे वहीं दूसरी ओर पारंपरिक खेलकूद सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आवासीय और प्रवासी समुदाय को एक दूसरे के नजदीक लाने का प्रयास किया जाएगा।
बाध्ययंत्रो के द्वारा जहां स्थानीय परम्परागत स्थानीय कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका देंगे वहीं किस्से रिखणीखाल के कार्यक्रम के माध्यम से नई पीढ़ी को क्षेत्र के ऐतिहासिक सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व से परिचय कराया जाएगा।
मुख्य कार्यक्रम:- मुख्य कार्यक्रम तीनदिवसीय होगा 15/05/2018 से 17/05/2018 तक,,,लेकिन कार्यक्रम की गतिविधियाँ लगभग 15 दिन तक चलेगी।01/05/2018 को माँ बाँजा देवी से ताड़केस्वर धाम तक श्री राम चन्द्र जी की रथ यात्रा (माँ बंजादेवी, डोंटियाल देव,श्री हनुमान मंदिर सोलीखांद,माँ नोशेणा देवी,श्री ताड़केस्वर धाम और भूमि पूजन मंदिर की स्थापना रिखणीखाल स्कूल में) )
सभी 81 ग्राम सभावों के ग्राम देवता,जल देवता की साफ सफाई और पूजन हर महीने रिखणीखाल क्षेत्र में बैठकों का आयोजन किया जाएगा जिस से क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने में मदद मिलेगी। शरकारी योजनावों का किस तरह फायदा लिया जाए और समाज में अपनी भूमिका किस तरह से तय की जाय।
रिखणीखाल महोत्सव मि पहले बैठक 05/10/2017 को कन्या बिद्यालय कोटरी सैण में अपराहन 2 बजे से होनी सुनिश्चित है और अगली बैठक 06/10/2017 को देहरादून उत्तरांचल उत्थान परिषद सेवा निकेतन कैलाश हॉस्पिटल में साम 05 बजे सुनिश्चित है। इन बैठकों से हम रिखणीखाल महोत्सव की रूप रेखा से लोगों को रूबरू कराने वाले है। लोगों के अधिक से अधिक संख्या में आने की पूरी उम्मीद है। यही बैठकें हर महीने होते रहिंगे जिस से हम को लोगों के रुझान का पता चलता रहेगा।
कार्यक्रम के आयोजन की आवश्कता क्यों पड़ी-:
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कार्यक्रम की आवश्कता तो बहुत पहले से थी जब सन।1995 से 2015 के मध्य अचानक से लोगों ने शहरों की ओर रुख किया अचानक से सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन आया लोगों में। क्षेत्रीय लोगों में अचानक गॉँव से शहरों की ओर जाने की एक होड़ सी लगी। गाँव पाहाडों में बिरानियाँ दिखने लगी रातों रात लोगों ने महामारी की तरह पलायन किया। शिक्षा और स्वास्थ्य स्वरोजगार की बदहाली तो सदा से रही पाहाडों में पर ऐसा क्या हुआ कि पृथक राज्य मिलते ही लोग अपनी जड़ों से बिछेदन कर के शहरों में जीवनयापन को निकल गए। भौगोलिक स्थिति से उत्तराखंड सुदूर और दुर्गम तो रहा ही है पर आर्थिक स्थिति से भी उत्तराखण्ड बहुत पिछड़ा है। और आज हाल ये है कि सामाजिक सांस्कृतिक स्थिति से भी हम कोषों दूर है। पर आज हम देख रहे है कि बिगत 17 सालों में उत्तराखंड से लगभग 33 साख लोगों ने अपने घर गॉँव छोड़े है लगभग 30 हजार गाँव आज भी पूर्ण रूप से खाली है और जो लोग गाँव में मजबूरी में रह रहे है उन की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है उन लोगों को मूलभूत सुविधा दिलाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हम यह कार्यक्रम कर रहे है। ताकि वो लोग स्वलम्बी हो सकें स्वस्थ रहे और शिक्षित बनें।
कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य-: कार्यक्र का मुख्य उद्देश्य है लोगों की जड़ चेतना को पुनः जागृत करना। प्रवासियों को पाहाडों की जड़ों से जोड़ना। प्रसासन का क्षेत्र की ओर ध्यान खींचने। मूलभूत शुबिधावों को क्षेत्र में रह रहे लोगों द्वारा उत्तपन करना या प्रसासन द्वारा मुहैया कराना।
आज जितना भी जन समाज पाहाडों में रह रहा है किसी भी परिस्थिति में वो अपना जीवनयापन कर रहा है उस की मानसिक आर्थिक सामाजिक स्थिति को मजबूत करना उन परिवारों को जीवन शैली में भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से जलवायु परिवर्तन के हिसाब से कैसे बदलाव लाना है उस की पूरी जानकारी दी जाएगी। कैसे पर्वतीय लोग स्वरोजगार को अपना सके कैसे पर्वतीय नागरिक स्वलम्बी हो सके कैसे पाहाडों का जनमानुष पाहाडों में ही रहे।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण-: कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण में हम ने हर पहलूँ हर बिंदु को छुवा है। जैसे.
खेती-: खाद बीज भण्डार, पशु पालन,उन्नत खेती और उन्नत बीजों की पहचान,मशरूम खेती की जानकारी बेमौसमी शब्जियाँ उगाना,सिंचाई के साधनो पर बिचार,मोटी इलाइची की खेती,कुकुड पालन, बन्यजीवों से खेती को बचाना, बागवानी, खेलकूद-:स्कूली बच्चों के खेलकूद प्रतियोगिता जिस में खो-खो, कब्बडी,दौड, चित्रकारी, भाषा पर बात विवाद,कविता पाठ,चित्रकला
निशुल्क पुस्तकालय-: क्षेत्र के सभी 152 स्कूलों में निशुल्क पुस्तकालयों की स्थापना। देश दुनियाँ से लोगों द्वारा पुस्तकें दानस्वरूप भेंट किये है उन को रिखणीखाल क्षेत्र में हर स्कूल को पुस्तकालय के रूप में भेंट करना।
बाध्ययंत्रो की प्रदशनी-: उत्तराखण्ड के तमाम बाध्ययंत्रो की प्रदशनी और बाधकों द्वारा सुंदर प्रतियोगिता का आयोजन
महिलाओं की भागिता-: समाज में परिवार निर्माण में महिलाओं की भागीदारी,समाज के विकास में महिलावों की भूमिका झुमेलों,थडिया,चोंफल, बाजुबंद,बौ
कौथिग का आयोजन-:जिस को कि पूर्ण रूप से कौथिग का रूप दिया जयेगा नए पुराने पहाड़ी परिधानों की दुकानें खेती से सम्बंधित सामग्री की दुकानें महिला परिधानों,बच्चों के खिलौने पुस्तक मेला खानपान पहाड़ी पकवानों का जायका और दैनिक जीवन में काम आने वाले सामान फल फूलों का बाजार लगाया जाएगा।
स्वास्थ्य-: स्वास्थ से सम्बंधित कार्यक्रम में निःशुल्क शारिरिक जांच किया जाएगा मौसमी बीमारियों और साफ सफाई के कार्यक्रम के तहत लोगों को अपने घर के आसपास की सफाई के तरीके अपने शरीर की फाई, स्वच्छ भारत अभियान से लोगों को जोड़ना,योग शिविरों का आयोजन करना,स्वास्थ्य सम्बंधित किट दिए जाएंगे, स्वास्थ्य सम्बंधित प्रशिक्षण की ब्यवस्था की जाएगी।
शरकारी योजना-: सड़क,पेयजल,सिंचाई,स्वास्थ्य,शिक्षा स्वरोजगार इन मुद्दों पर सरकारी महकमे का ध्यान खींचना हनारी प्राथमिकता है सम्बंधित विभाग से सम्बंधित मंत्रालय को बिग्यंप्ति देना उन के द्वारा पूर्व में किये गए कार्य का आंकलन करना और भावी योजनावों का शिलान्यास भूमि पूजन का दिन तय होगा।
रिखणीखाल महोत्सव इसी दिशा में किया जाने वाला एक प्रयास है । 15/05/2018 से 17/05/2018 के मध्य में होने वाले तीनदिवसीय एतिहासिक भब्य रिखणीखाल महोत्सव क्षेत्र के विकास की नीव रखने वाला है। रिखणीखाल महोत्सव के माध्यम से हम रिखणीखाल के आवासी और प्रवासी अपने जाड़ों को ढूंडने उसे समझने और उन से जुड़ने का प्रयास कर रहे है।
इस महोत्सव के माध्यम से जहाँ हम एक तरफ अपने धार्मिक प्रतीक (ग्राम देवता जल देवता) को याद करेंगे वहीं दूसरी ओर पारंपरिक खेलकूद सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आवासीय और प्रवासी समुदाय को एक दूसरे के नजदीक लाने का प्रयास किया जाएगा।
बाध्ययंत्रो के द्वारा जहां स्थानीय परम्परागत स्थानीय कलाकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौका देंगे वहीं किस्से रिखणीखाल के कार्यक्रम के माध्यम से नई पीढ़ी को क्षेत्र के ऐतिहासिक सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व से परिचय कराया जाएगा।
मुख्य कार्यक्रम:- मुख्य कार्यक्रम तीनदिवसीय होगा 15/05/2018 से 17/05/2018 तक,,,लेकिन कार्यक्रम की गतिविधियाँ लगभग 15 दिन तक चलेगी।01/05/2018 को माँ बाँजा देवी से ताड़केस्वर धाम तक श्री राम चन्द्र जी की रथ यात्रा (माँ बंजादेवी, डोंटियाल देव,श्री हनुमान मंदिर सोलीखांद,माँ नोशेणा देवी,श्री ताड़केस्वर धाम और भूमि पूजन मंदिर की स्थापना रिखणीखाल स्कूल में) )
सभी 81 ग्राम सभावों के ग्राम देवता,जल देवता की साफ सफाई और पूजन हर महीने रिखणीखाल क्षेत्र में बैठकों का आयोजन किया जाएगा जिस से क्षेत्र के लोगों को जागरूक करने में मदद मिलेगी। शरकारी योजनावों का किस तरह फायदा लिया जाए और समाज में अपनी भूमिका किस तरह से तय की जाय।
रिखणीखाल महोत्सव मि पहले बैठक 05/10/2017 को कन्या बिद्यालय कोटरी सैण में अपराहन 2 बजे से होनी सुनिश्चित है और अगली बैठक 06/10/2017 को देहरादून उत्तरांचल उत्थान परिषद सेवा निकेतन कैलाश हॉस्पिटल में साम 05 बजे सुनिश्चित है। इन बैठकों से हम रिखणीखाल महोत्सव की रूप रेखा से लोगों को रूबरू कराने वाले है। लोगों के अधिक से अधिक संख्या में आने की पूरी उम्मीद है। यही बैठकें हर महीने होते रहिंगे जिस से हम को लोगों के रुझान का पता चलता रहेगा।
कार्यक्रम के आयोजन की आवश्कता क्यों पड़ी-:
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कार्यक्रम की आवश्कता तो बहुत पहले से थी जब सन।1995 से 2015 के मध्य अचानक से लोगों ने शहरों की ओर रुख किया अचानक से सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन आया लोगों में। क्षेत्रीय लोगों में अचानक गॉँव से शहरों की ओर जाने की एक होड़ सी लगी। गाँव पाहाडों में बिरानियाँ दिखने लगी रातों रात लोगों ने महामारी की तरह पलायन किया। शिक्षा और स्वास्थ्य स्वरोजगार की बदहाली तो सदा से रही पाहाडों में पर ऐसा क्या हुआ कि पृथक राज्य मिलते ही लोग अपनी जड़ों से बिछेदन कर के शहरों में जीवनयापन को निकल गए। भौगोलिक स्थिति से उत्तराखंड सुदूर और दुर्गम तो रहा ही है पर आर्थिक स्थिति से भी उत्तराखण्ड बहुत पिछड़ा है। और आज हाल ये है कि सामाजिक सांस्कृतिक स्थिति से भी हम कोषों दूर है। पर आज हम देख रहे है कि बिगत 17 सालों में उत्तराखंड से लगभग 33 साख लोगों ने अपने घर गॉँव छोड़े है लगभग 30 हजार गाँव आज भी पूर्ण रूप से खाली है और जो लोग गाँव में मजबूरी में रह रहे है उन की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है उन लोगों को मूलभूत सुविधा दिलाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हम यह कार्यक्रम कर रहे है। ताकि वो लोग स्वलम्बी हो सकें स्वस्थ रहे और शिक्षित बनें।
कार्यक्रम के मुख्य उद्देश्य-: कार्यक्र का मुख्य उद्देश्य है लोगों की जड़ चेतना को पुनः जागृत करना। प्रवासियों को पाहाडों की जड़ों से जोड़ना। प्रसासन का क्षेत्र की ओर ध्यान खींचने। मूलभूत शुबिधावों को क्षेत्र में रह रहे लोगों द्वारा उत्तपन करना या प्रसासन द्वारा मुहैया कराना।
आज जितना भी जन समाज पाहाडों में रह रहा है किसी भी परिस्थिति में वो अपना जीवनयापन कर रहा है उस की मानसिक आर्थिक सामाजिक स्थिति को मजबूत करना उन परिवारों को जीवन शैली में भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से जलवायु परिवर्तन के हिसाब से कैसे बदलाव लाना है उस की पूरी जानकारी दी जाएगी। कैसे पर्वतीय लोग स्वरोजगार को अपना सके कैसे पर्वतीय नागरिक स्वलम्बी हो सके कैसे पाहाडों का जनमानुष पाहाडों में ही रहे।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण-: कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण में हम ने हर पहलूँ हर बिंदु को छुवा है। जैसे.
खेती-: खाद बीज भण्डार, पशु पालन,उन्नत खेती और उन्नत बीजों की पहचान,मशरूम खेती की जानकारी बेमौसमी शब्जियाँ उगाना,सिंचाई के साधनो पर बिचार,मोटी इलाइची की खेती,कुकुड पालन, बन्यजीवों से खेती को बचाना, बागवानी, खेलकूद-:स्कूली बच्चों के खेलकूद प्रतियोगिता जिस में खो-खो, कब्बडी,दौड, चित्रकारी, भाषा पर बात विवाद,कविता पाठ,चित्रकला
निशुल्क पुस्तकालय-: क्षेत्र के सभी 152 स्कूलों में निशुल्क पुस्तकालयों की स्थापना। देश दुनियाँ से लोगों द्वारा पुस्तकें दानस्वरूप भेंट किये है उन को रिखणीखाल क्षेत्र में हर स्कूल को पुस्तकालय के रूप में भेंट करना।
बाध्ययंत्रो की प्रदशनी-: उत्तराखण्ड के तमाम बाध्ययंत्रो की प्रदशनी और बाधकों द्वारा सुंदर प्रतियोगिता का आयोजन
महिलाओं की भागिता-: समाज में परिवार निर्माण में महिलाओं की भागीदारी,समाज के विकास में महिलावों की भूमिका झुमेलों,थडिया,चोंफल, बाजुबंद,बौ
कौथिग का आयोजन-:जिस को कि पूर्ण रूप से कौथिग का रूप दिया जयेगा नए पुराने पहाड़ी परिधानों की दुकानें खेती से सम्बंधित सामग्री की दुकानें महिला परिधानों,बच्चों के खिलौने पुस्तक मेला खानपान पहाड़ी पकवानों का जायका और दैनिक जीवन में काम आने वाले सामान फल फूलों का बाजार लगाया जाएगा।
स्वास्थ्य-: स्वास्थ से सम्बंधित कार्यक्रम में निःशुल्क शारिरिक जांच किया जाएगा मौसमी बीमारियों और साफ सफाई के कार्यक्रम के तहत लोगों को अपने घर के आसपास की सफाई के तरीके अपने शरीर की फाई, स्वच्छ भारत अभियान से लोगों को जोड़ना,योग शिविरों का आयोजन करना,स्वास्थ्य सम्बंधित किट दिए जाएंगे, स्वास्थ्य सम्बंधित प्रशिक्षण की ब्यवस्था की जाएगी।
शरकारी योजना-: सड़क,पेयजल,सिंचाई,स्वास्थ्य,शिक्षा स्वरोजगार इन मुद्दों पर सरकारी महकमे का ध्यान खींचना हनारी प्राथमिकता है सम्बंधित विभाग से सम्बंधित मंत्रालय को बिग्यंप्ति देना उन के द्वारा पूर्व में किये गए कार्य का आंकलन करना और भावी योजनावों का शिलान्यास भूमि पूजन का दिन तय होगा।
Its really a great thought and will a turning point for the region and people of the area to think about this issue, root causes and possible solutions, everyone must play his role actively to change the life of people of Uttarakhand and change the world.
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