रिखणीखाल ये मेरा बिकास खण्ड है उत्तराखंड के जिल्ला पौड़ी लैंसडौन
तहसील लैंसडौन विधानसभा में बसा है। इस के एक तरफ जयहरीखाल दूसरी तरफ
बीरोंखाल तीसरी तरफ नैनीडांडा चौथी तरफ पोखडा ब्लॉक है जिस में 245 गॉँव 81
ग्राम सभा है और जिस की कुल आवादी है शरकारी आंकड़ों में 35719 इस रिखणीखाल
में पट्टी पैनो,पट्टी इडिया कोट,पट्टी बदल पुर,पट्टी बिचला बदल पुर। किसी
जमाने में 52 गढ़ों के एक गढ़ गुज़दू गढ़ में यह छेत्र आता था मंदाल नदी और
पूर्वी नयार नदी इस रिखणीखाल ब्लॉक के मुख्य नदियाँ है छोटी मोटी और भी कही
नदियाँ है नयार और मंदाल मुख्य है पर नयार से सिंचाई का कोई साधन नही है
फिलहाल कुछ छुट पुट जगह को छोड़ दें तो नयार का पानी रिखणीखाल में काम ही
नही आता वैसे नयार दो है पूर्वी और पश्चमी नयार पर पश्चमी नयार रिखणीखाल
में नही आता है वैसे दोनों नयार का उद्द्गम श्रोत एक ही पहाड़ी है और दोनों
नयार सतपुली बांघाट में मिलती है सतपुली में उन दोनों नदियों के संगम में
वार्षिक मेला भी लगता है। नयार आगे जा के अलकनंदा नदी में मिलती है और
मंदाल नदी राम गंगा में जा के मिलती है।
अब बात करते है रिखणीखाल की यहाँ के लोगों का एक जमाने में मुख्य ब्यवसाय सिर्फ खेती थी या आर्मी में भर्ती होना नोजवानो का एक मात्र सपना। फलों की बात करें तो पैनो पट्टी में आम और गर्म प्रजाति के हर फल होते है बाकी सभी पट्टियों में अखरोड,काफ़ल,हिसोरां,घिंगोरा, चवाला,सेब,नासपाती होते है। मक्के की खेती धान गेहूं दलहनी खेती यहाँ अच्छि होती है पर लोगों का उस में अपना गुजारा ही होता है ब्यवसाय के हिसाब से नही है खेती।
बात 1990 के दसक की है या उस से पहले की है पर आज नोकरीं पेशा ही यहां का मुख्य आय का श्रोत है यहाँ लोगों ने बड़ी तेजी से सहरों का रुख किया है मेरी अपनी नजर में कुछ गॉँव ९०% तो कुछ गॉँव पूर्ण तूप से खाली हो गए है।
जैसे-:कांडा, चिलाऊँ, तेडिया,पांड,सिरस्वाडी, बांजी खाल,आठबाखल, राजबो तल्ला और मल्ला, नावे तल्ली,भँयासु, वलसा,ढुङ्गधार,डिंड,जुई,किम गॉँव, चेबड़, चिलावं,अन्द्रोंली,वड्डा, पातल, अंदरसों,पलि गॉँव, कुंडू डाँड़,घ्वटुला,बड़खेत तल्ला और मल्ला, जुकनियाँ,गुजरी,डबराड,कोटरी वल्ली और कोटरी पल्ली बुंगा,पडेर गॉँव, धामधार, कुमालडी,चिमना, टांड़यों,मैला गॉँव, सौंप खाल,द्वारी,सेरा गाड़,गाड़ियों,धूता डाँड़,तिमला खोली, पैनोल गॉँव बुद्ध गॉँव,ल्विठ्या,जामरी,मुँडेणा तिमल सैण,डबुर,गाजा, सुलमेडी,सुन्दरोली, पांच गॉँव,खिंकरो, आदि कुछ गॉँव है जिन की हालत बहुत ही दैनीय है पलायन की वजह से।
इस छेत्र की अन्देखी बहुत हुई है आज इस छेत्र में अस्थाई थाना है जो रिखणीखाल में है बाकी इस छेत्र में सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नही है। 85km दूर कोटद्वार और 53km दूर लैंसडौन पड़ता है। पेट्रोल पम्प् भी 53km दूर है सूचना का कोई साधन नही है लगभग टेलिफोन टावर 28 है पर काम अपने मन मुताबित करते है,करतिया,चौडू डाँडा,राजबो,मेंदणी बयोला रिखणीखाल में लगे फ़ोन के खम्बे सिर्फ दिखावे के है लगभग सिग्नल ना के बराबर है। हॉस्पिटल की सुविधा सिर्फ रिखणीखाल में है जिस में सिर्फ बुखार सिर दर्द की दवा मिलती है और इलाज करने वाला भी वाड बॉय है कोई स्पेसलिस्ट डॉ या नर्स नही है। 108 सेवा है वही इक ऐसी सेवा है जिस पर हम को फक्र है पर मरीज को 108 सेवा लेकर कहाँ जाएगी ...? मरीज को घर से उठा तो देती है एम्बुलेंस पर आखिर राजकीय चिकित्सालय कोटद्वार रैफर करना पड़ता है और वहाँ के हालात और भुरे है कोटद्वार से दून या जोलीग्रांट या महंत इंद्रेश।
इस छेत्र से बहुत है ग़द्दावर नेता निकले है ये छेत्र लैंसडौन विधानसभा छेत्र में आता है मगर ये छत्रे 2 बार धूमाकोट विधानसभा में रहा था। लैंसडौन विधानसभा से सुरेंद्र सिंह नेगी जी(पूर्व पेयजल मंत्री) ने पहली बार 1992 में निर्दलीय चुनाव लड़ा था चुनाव चिन्ह था दो पत्ती उस के वाद सतपाल महाराज जी (बर्तमान पर्यटकमंत्री) ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ा था 1985 चुनाव चिन्ह था फूल चढ़ाती हुई महिला, भुवनचंद्र खंडूरी (निबर्तमान मुख्यमंत्री) तेज़ पाल सिंह रावत जी और प्रथम ब्लॉक प्रमुख श्वश्री भारत सिंह रावत जी जैसे विधायक रहे है यहाँ से बर्तमा में दलीप रावत जी है छेत्रीय विधायक जो भारत सिंह रावत जी के सुपुत्र है।
पर सावाल इस का रहा है कि इस छेत्र में विकास ने नजर तक नही मारी है ब्लॉक स्तर पर एक महाविद्यालय खुला है जिस में भी सब्जेक्ट पूरे नही है। भावी पीढ़ी का भविष्य घर का न घाट का है। भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से देखें तो बहुत ही सुगम छेत्र है और पट्टी पैनो तो बहुत ही सुगम है। पर यहां इस छेत्र पर किसी की नजर तक नही गई।
पलायन इस अनदेखी का एक नतीजा है। 90% गॉँव में पीने के पानी की और मवेशियो के लिए पानी चारे की बड़ी दिक्कत है। बनों के हिसाब से देखा जाय तो यहाँ पट्टी पैनो गर्म इलाका होने के कारण साल के जंगलों से घिरा है जो कि टाइगर प्रोजेक्ट ढिकाला के अन्तर्गत आता है और बाकी की तीनों पट्टी बाँज बुरासँ चीड़ देबदार के जंगलों से घिरा है।
यहाँ से अधिकतर लोग रामनगर, काशीपुर,रुड़की,हरिद्वार, देहरादून, कालागढ़,दिल्ली जा के बस गए है। छेत्र में बिजली भी बर्षात के दिनों में अठखेलियाँ खेलती है लगभग 25% गॉँव सड़क मार्ग से जुड़ें है। पूर्वी छाड़ियाणी में तो सड़क गए हुए 1 साल हुआ है औऱ गॉँव खाली हुए 8 महीने वही हाल धुरा,राजबो,डिंड,और जुगणिया डाँडा का भी है जहां सड़क जाने से पहले लोग चले गए है। अगर इस छेत्र में देखा जाय तो ताड़केश्वर महाधाम ही एक मात्र आस्था का केंद्र है। बाकी घूमने लायक हसीन वादियाँ तो है पर पर्यटक के लिए ये नाकाफी है। कोई होटल नही गेस्ट हाउस नही है। ग्राम सभा जुई में एक वृंदावन नाम ने होटल खुला है पर सब के बस की बात नही है वहां भी रुकना ठहरना। रेल मार्ग नही है जब कि सम्भव है उत्तरकाशी या बद्रीनाथ जैसी पहाड़ी भी नही है। पर सोचें कोन इस के बारे में 9 विद्यालय 12 वीं तक है और अध्यापक यहां भी नही है इस छेत्र में कमाल की बात है मात्र एक शिशु मंदिर है जो 5 वीं कक्षा तक उस के बाद कोई नबोदित विद्यालय या गैर सरकारी कोई शिक्षण संस्थान नही है। कंप्यूटर की पढ़ाई भी नही न कोई कोचिंग इंस्टिट्यूट। स्वास्थ्य और शिक्षा के मामले में यहाँ सब भगवान भरोसे है।
IPS,IFS,IS या NDA में यहाँ से बहुत लोग निकलें है पर पलायन की वजह से ये लोग अब गॉँव आते ही नही है। न किसी नेता को इस छेत्र की फिक्र है न छेत्रिय लोगों को। खेती प्रधान छेत्र का हाल ये है कि मात्र 28000 हेक्टियर मैसे से 5% जमीन खेती के लायक रह गई है बाकी पर झाड़ी उगी है।
इस छेत्र में आने की किये बीरोंखाल से दुगड्डा से नैनी डाँडा से सतपुली से आने का रास्ता है 75% सड़कें कच्ची है मात्र एक राष्ट्रीय राज मार्ग था जो दुगड्डा में राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर मिलना था पर नई सरकार ने अपनी दारू बेचो नीति के लिए उसे भी सहायक राजमार्ग कर दिया है। अब यहां के लिए सिर्फ टेक्सी,GMO की ही सुविधा है। सारा छेत्र सुगम है पर दुर्गमता की मार झेल रहा है। कोशस करना आप कि इस हसीन जगह को देखने जरूर आना और कुछ नही एक और आदमी मिल जाएगा हम को साथ में आँसूं बहाने वाला।
जय भारत जय उत्तराखंड
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लेखक-:देवेश आदमी (प्रवासी)
सम्पर्क-:9716541803
पट्टी पैनो रिखणीखाल
जिल्ला पौड़ी गढ़वाल
(देवभूमि उत्तराखंड)
अब बात करते है रिखणीखाल की यहाँ के लोगों का एक जमाने में मुख्य ब्यवसाय सिर्फ खेती थी या आर्मी में भर्ती होना नोजवानो का एक मात्र सपना। फलों की बात करें तो पैनो पट्टी में आम और गर्म प्रजाति के हर फल होते है बाकी सभी पट्टियों में अखरोड,काफ़ल,हिसोरां,घिंगोरा, चवाला,सेब,नासपाती होते है। मक्के की खेती धान गेहूं दलहनी खेती यहाँ अच्छि होती है पर लोगों का उस में अपना गुजारा ही होता है ब्यवसाय के हिसाब से नही है खेती।
बात 1990 के दसक की है या उस से पहले की है पर आज नोकरीं पेशा ही यहां का मुख्य आय का श्रोत है यहाँ लोगों ने बड़ी तेजी से सहरों का रुख किया है मेरी अपनी नजर में कुछ गॉँव ९०% तो कुछ गॉँव पूर्ण तूप से खाली हो गए है।
जैसे-:कांडा, चिलाऊँ, तेडिया,पांड,सिरस्वाडी, बांजी खाल,आठबाखल, राजबो तल्ला और मल्ला, नावे तल्ली,भँयासु, वलसा,ढुङ्गधार,डिंड,जुई,किम गॉँव, चेबड़, चिलावं,अन्द्रोंली,वड्डा, पातल, अंदरसों,पलि गॉँव, कुंडू डाँड़,घ्वटुला,बड़खेत तल्ला और मल्ला, जुकनियाँ,गुजरी,डबराड,कोटरी वल्ली और कोटरी पल्ली बुंगा,पडेर गॉँव, धामधार, कुमालडी,चिमना, टांड़यों,मैला गॉँव, सौंप खाल,द्वारी,सेरा गाड़,गाड़ियों,धूता डाँड़,तिमला खोली, पैनोल गॉँव बुद्ध गॉँव,ल्विठ्या,जामरी,मुँडेणा तिमल सैण,डबुर,गाजा, सुलमेडी,सुन्दरोली, पांच गॉँव,खिंकरो, आदि कुछ गॉँव है जिन की हालत बहुत ही दैनीय है पलायन की वजह से।
इस छेत्र की अन्देखी बहुत हुई है आज इस छेत्र में अस्थाई थाना है जो रिखणीखाल में है बाकी इस छेत्र में सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नही है। 85km दूर कोटद्वार और 53km दूर लैंसडौन पड़ता है। पेट्रोल पम्प् भी 53km दूर है सूचना का कोई साधन नही है लगभग टेलिफोन टावर 28 है पर काम अपने मन मुताबित करते है,करतिया,चौडू डाँडा,राजबो,मेंदणी बयोला रिखणीखाल में लगे फ़ोन के खम्बे सिर्फ दिखावे के है लगभग सिग्नल ना के बराबर है। हॉस्पिटल की सुविधा सिर्फ रिखणीखाल में है जिस में सिर्फ बुखार सिर दर्द की दवा मिलती है और इलाज करने वाला भी वाड बॉय है कोई स्पेसलिस्ट डॉ या नर्स नही है। 108 सेवा है वही इक ऐसी सेवा है जिस पर हम को फक्र है पर मरीज को 108 सेवा लेकर कहाँ जाएगी ...? मरीज को घर से उठा तो देती है एम्बुलेंस पर आखिर राजकीय चिकित्सालय कोटद्वार रैफर करना पड़ता है और वहाँ के हालात और भुरे है कोटद्वार से दून या जोलीग्रांट या महंत इंद्रेश।
इस छेत्र से बहुत है ग़द्दावर नेता निकले है ये छेत्र लैंसडौन विधानसभा छेत्र में आता है मगर ये छत्रे 2 बार धूमाकोट विधानसभा में रहा था। लैंसडौन विधानसभा से सुरेंद्र सिंह नेगी जी(पूर्व पेयजल मंत्री) ने पहली बार 1992 में निर्दलीय चुनाव लड़ा था चुनाव चिन्ह था दो पत्ती उस के वाद सतपाल महाराज जी (बर्तमान पर्यटकमंत्री) ने भी निर्दलीय चुनाव लड़ा था 1985 चुनाव चिन्ह था फूल चढ़ाती हुई महिला, भुवनचंद्र खंडूरी (निबर्तमान मुख्यमंत्री) तेज़ पाल सिंह रावत जी और प्रथम ब्लॉक प्रमुख श्वश्री भारत सिंह रावत जी जैसे विधायक रहे है यहाँ से बर्तमा में दलीप रावत जी है छेत्रीय विधायक जो भारत सिंह रावत जी के सुपुत्र है।
पर सावाल इस का रहा है कि इस छेत्र में विकास ने नजर तक नही मारी है ब्लॉक स्तर पर एक महाविद्यालय खुला है जिस में भी सब्जेक्ट पूरे नही है। भावी पीढ़ी का भविष्य घर का न घाट का है। भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से देखें तो बहुत ही सुगम छेत्र है और पट्टी पैनो तो बहुत ही सुगम है। पर यहां इस छेत्र पर किसी की नजर तक नही गई।
पलायन इस अनदेखी का एक नतीजा है। 90% गॉँव में पीने के पानी की और मवेशियो के लिए पानी चारे की बड़ी दिक्कत है। बनों के हिसाब से देखा जाय तो यहाँ पट्टी पैनो गर्म इलाका होने के कारण साल के जंगलों से घिरा है जो कि टाइगर प्रोजेक्ट ढिकाला के अन्तर्गत आता है और बाकी की तीनों पट्टी बाँज बुरासँ चीड़ देबदार के जंगलों से घिरा है।
यहाँ से अधिकतर लोग रामनगर, काशीपुर,रुड़की,हरिद्वार, देहरादून, कालागढ़,दिल्ली जा के बस गए है। छेत्र में बिजली भी बर्षात के दिनों में अठखेलियाँ खेलती है लगभग 25% गॉँव सड़क मार्ग से जुड़ें है। पूर्वी छाड़ियाणी में तो सड़क गए हुए 1 साल हुआ है औऱ गॉँव खाली हुए 8 महीने वही हाल धुरा,राजबो,डिंड,और जुगणिया डाँडा का भी है जहां सड़क जाने से पहले लोग चले गए है। अगर इस छेत्र में देखा जाय तो ताड़केश्वर महाधाम ही एक मात्र आस्था का केंद्र है। बाकी घूमने लायक हसीन वादियाँ तो है पर पर्यटक के लिए ये नाकाफी है। कोई होटल नही गेस्ट हाउस नही है। ग्राम सभा जुई में एक वृंदावन नाम ने होटल खुला है पर सब के बस की बात नही है वहां भी रुकना ठहरना। रेल मार्ग नही है जब कि सम्भव है उत्तरकाशी या बद्रीनाथ जैसी पहाड़ी भी नही है। पर सोचें कोन इस के बारे में 9 विद्यालय 12 वीं तक है और अध्यापक यहां भी नही है इस छेत्र में कमाल की बात है मात्र एक शिशु मंदिर है जो 5 वीं कक्षा तक उस के बाद कोई नबोदित विद्यालय या गैर सरकारी कोई शिक्षण संस्थान नही है। कंप्यूटर की पढ़ाई भी नही न कोई कोचिंग इंस्टिट्यूट। स्वास्थ्य और शिक्षा के मामले में यहाँ सब भगवान भरोसे है।
IPS,IFS,IS या NDA में यहाँ से बहुत लोग निकलें है पर पलायन की वजह से ये लोग अब गॉँव आते ही नही है। न किसी नेता को इस छेत्र की फिक्र है न छेत्रिय लोगों को। खेती प्रधान छेत्र का हाल ये है कि मात्र 28000 हेक्टियर मैसे से 5% जमीन खेती के लायक रह गई है बाकी पर झाड़ी उगी है।
इस छेत्र में आने की किये बीरोंखाल से दुगड्डा से नैनी डाँडा से सतपुली से आने का रास्ता है 75% सड़कें कच्ची है मात्र एक राष्ट्रीय राज मार्ग था जो दुगड्डा में राष्ट्रीय राजमार्ग 19 पर मिलना था पर नई सरकार ने अपनी दारू बेचो नीति के लिए उसे भी सहायक राजमार्ग कर दिया है। अब यहां के लिए सिर्फ टेक्सी,GMO की ही सुविधा है। सारा छेत्र सुगम है पर दुर्गमता की मार झेल रहा है। कोशस करना आप कि इस हसीन जगह को देखने जरूर आना और कुछ नही एक और आदमी मिल जाएगा हम को साथ में आँसूं बहाने वाला।
जय भारत जय उत्तराखंड
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लेखक-:देवेश आदमी (प्रवासी)
सम्पर्क-:9716541803
पट्टी पैनो रिखणीखाल
जिल्ला पौड़ी गढ़वाल
(देवभूमि उत्तराखंड)
Very good information boss
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